Friday, March 8, 2019

Woman Day

Woman Day
औरतों के बारे में गुरु नानक देव जी जी ने लिखा है
*सो क्यों मंदा आखिए
जित्त जम्मे राजान*
इसका मतलब है कि उसको बुरा क्यों कहे क्योंकि उसने राजाओं को, ऋषि-मुनियों को पैदा किया। कुछ ऋषि-मुनियों ने अपने आप को महान बता दिया और औरत को नर्क का द्वार कहा। हमें इस सोच से ऊपर उठना होगा।
औरत  पैर की जूती नहीं। लोग जो इसको जूती समझते हैं वो  अपनी मांँ का ही निरादर करते हैं जोकि उनको भी जन्म  इक औरत ने ही दिया है  ।
आदमी का काम है पैसा कमाना, परिवार के लिए सुख साधन  इक्ट्ठा करने।  औरत का काम है पैसे का सदुपयोग करना, बच्चों को अच्छे संस्कार देना, मकान को घर बनाना,  वो  घर की छोटी बड़ी सारी चीजें बनाती है ।आदमी परेशान होता है तो वह हमेशा औरत से शांति का आशीर्वाद पाता है। शिव शक्ति का प्रतीक है और पार्वती  माया की।दोनों के मिलन से सृष्टि पैदा होती है चलती है।
तो संसार सिर्फ औरत से, और ना अकेले आदमी से चलेगा।  दोनों को मिलजुल कर जीवन की गाड़ी खींचनी होगी । सुख-दुख इकट्ठे झेलने होंगे, बच्चों को पढ़ाना होगा, नए सपने देखने होंगे, पंख लगाकर आसमान में उड़ने के सपने।

अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दे  मुझे 
इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिए 

इश्क है तो इश्क का इज़हार होना चाहिए 
आपको भी चेहरे  से बिमार होना चाहिए 
# मुनव्वर राना


*रिटायर नौकरी से हुए हैं जिंदगी से नहीं*

 कल मेरी पत्नी ऑटो में बैठकर कहीं जा रही थी तो ऑटो में एक लेडीआकर बैठी जो लगभग 60 साल की होगी । पंजाबी सूट, पंजाबी जूती , बहुत बन ठन कर आई थी। बड़ी खुश नजर आ रही थी वो।  

उसने मेरी पत्नी को बताया कि वह पिछले ही साल रिटायर हुई है। 35 साल स्कूल में नौकरी की। जिंदगी की जद्दोजहद में अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी इच्छाओं का कई बार गला घोंटा। बच्चों की पढ़ाई ,कपड़े सिलवाने के लिए, कई बार अपने नए सूट नहीं सिलवा पाई वो। हार श्रंगार करने का मन होता तो वो नहीं कर पाती थी। 

चंडीगढ़ में पली बढ़ी थी और फिर आके रुद्रपुर में रहने लग गई थी । बड़े शहर से आकर छोटे शहर में व्यस्त होना और वहीं पर पूरी जिंदगी बिता देना बहुत बड़ी बात  है।

 उसने बताया कि वह रिटायर होने के बाद 12 लेडीज़ ने मिलकर  किट्टी  डाल रखी है । वह  महीने में  एक बार जरूर मिलती हैं। बहाने से हर महीने नए सूट सिलवा लेती हैं और खूब गपशप करती हैं । एक दिन के लिए रसोई से छुट्टी हो जाती है। 

अपनी जिंदगी के पुराने दिनों को याद करते हुए उसने यह भी बताया कि आज एक औरत घर से रो कर आई थी, शायद उसके पति उसको किट्टी पार्टी में आने नहीं दे रहे थे। वो कहने लगी अभी तो वो रिटायर हो गई , बूढी हो गई है, अब कहां वह भाग जाएगी? जब भागने की उम्र थी तक तो  नहीं भागी। 

 इस औरत ने उसको कहा ,अब पति से डरना छोड़ दे। अपने ढंग से अपनी जिंदगी जी, जो पूरी उम्र नहीं बदला अब क्या बदलेगा? वैसे ही घटियानूसी सोच लेकर  धरती पे आया और ऐसे ही घटियानूसी सोच लेकर इस संसार से विदा हो जाएगा। तू उसके लिए अपनी जिंदगी मत बर्बाद कर । 

उसने बताया कि बच्चे अब बड़े हो गए हैं। जिन बच्चों के लिए विषय में अपनी खुशियां की कुर्बानी दी वह बड़े होकर अपनी पत्नी की बाजू में बाजू डाल कर फिल्म देखने चले जाते हैं और मां-बाप को पूछते भी नहीं मांँ तुम चलोगी क्या? तो यह सब देखते हुए उसने यह फैसला किया कि जिंदगी को अपने ही ढंग से, अपने ही रंग से जीना है ।अब समझौता करने का कोई वक्त नहीं है।

 लड़कियां जो पैदा होती है पहले भाई का डर ,मां बाप का डर,  फिर पति का डर  किसी डर में उनकी सारी जिंदगी बीत जाती है । बहुत कम औरतें होती हैं जिनको की कुछ ऐसी जगह मिले , जिसमें वह पूरा खिल सकें, अपनी पूरी जिंदगी को जी सकें।

 मैं यह किस्सा आपको इसलिए सुना रहा हूं कि हमारी भी पत्नी है,  हमारी बेटी है, वो  कहीं ऐसी ही गुलामी का शिकार ना हो जाए । हम भी उसको पूरा जीने का मौका दें। समय दें, स्थान दे, वह मुस्कुराते हुए जिंदगी जी सकें। 

इतना कहते  हुए वो ऑटो से उतरी । यह सारी बात मेरी पत्नी ने मुझे सुनाई, तो मैंने इस किस्से  को यही नाम दिया कि "हम नौकरी से रिटायर हुए हैं जिंदगी से नहीं।"
 आज के लिए अलविदा, फिर मिलेंगे एक नए किस्से के साथ।


08.03.2019
Rajneesh Jass
Rudrarpur
Uttrakhand

Sunday, March 3, 2019

#journey_ramnagar_uttrakhand

#bajaj_vendor_get_together_2019
टेक्निकल लाइन में  काम  करते हुए आदमी बोर भी हो जाता है। टारगेट, नंबर, प्रोडक्शन, क्वालिटी से कभी रिलेक्स भी होना चाहता है।
बजाज पंतनगर में Customer और Vendor मिलकर एक परिवार की तरह सारी खुशियां मनाते हैं, कोई मुश्किल भी आए तो उससे मिलकर हल करते हैं।
महात्मा गांधी ने  कहा है, Rest is a change of Profession. अगर हम मानसिक काम कर रहे हैं तो हमें शारीररिक  काम करना चाहिए ,अगर हम शारीरिक कर रहे हैं  तो हमें मानसिक काम करना चाहिए।
तो रेस्ट करने के लिए हम  रविवार रामनगर गए। यह सारा Initiative  Mr.  Avinash Kumar, Bajaj Auto Ltd,  Pantnagar, Quality Head की तरफ से हुआ ।
हल्द्वानी कालाढूंगी से होते हुए हमारे राम नगर पहुंचे ।कालाढूंगी में जिम कॉर्बेट म्यूजियम है, जिनके बारे में आगे बता रहा हूँ।  रामनगर की सारे होटल जिम कॉर्बेट के नाम पर है ।यहां पर जंगल सफारी  जिसमें हम खुली जीप में जंगल के अंदर घूमते हैं , जिसमें कि चीते , हाथी, हिरन जंगली जानवर और  पंछी हैं।
तो चलिए मुड़ते हैं रामनगर की यात्रा पर । सड़क के दोनों घने पेड़ और बीच में से निकलती हुई कारें । फरवरी का महीना है तो ठंडक भी हो रही है। हम सुबह लगभग 10:00 के करीब रामनगर होटल पहुंच गये । वहां पर कई लोग पहले पहुंचे हुए थे,   कुछ लोग पीछे आ रहे थे ।
जाते ही कुल्हड़ में चाय पीने का मौका मिला साथ में स्नेक्स थे । एक तरफ कोसी नदी बह रही है  और उसके पीछे पहाड़ हैं जिसकी वीडियो में इस में शेयर करूंगा। उसके साथ 24 एकड़ में बना हुआ यह होटल जिसमें की स्विमिंग पूल, मसाज स्पा, टेबल टेनिस ,घुड़सवारी बच्चों के लिए झूले  हैं। ये फेमिली Get Together बजाज की तरफ से हर साल की जाती है। बजाज कंपनी के 16 वेंडर हैं । उसके क्वालिटी हेड , Second Line और स्टाफ लोग अपनी पत्नी के परिवार के साथ यहां
आते हैं ।
रूटीन से थोड़ा हटके काम।सीमेंट के सोफे,उस पर गद्दे, कुर्सियां लगी हुई थी। उन पर सभी लोग बैठ गए और हम करने लग गए फिर एंकरिंग ।
सभी family को एक-एक करके बुलाया, उन्होंने अपने बारे में जानकारी दी।  किस की लव मैरिज है, किसकी अरेंज मैरिज है?  क्या क्या घर पर होता है?  ऐसे मज़ाक भी चलते रहे। बच्चों ने डाँस किया, देश भक्ति के गाने, चुटकुले, यह महफिल रंग पकड़ती गई ।
मौसम ने कई रंग बदले, कभी धूप - कभी बादल।
उसके बाद हर एक Family Photograh हुई ।फिर हम लोग खाना खाने चले गए। होटल  बढ़िया तरीके से मेंटेन किया हुआ है।
खाना खाकर लौटे तो  मोर की पीहू पीहू सुनाई दी।  गाँव की याद ताज़ा  हो गई।
फिर बच्चों को ड्राइंग के लिए कलर और किताबें दी गई । फिर चली म्यूजिकल चेयर ।
फिर कोई यह कार्यक्रम बड़ा अच्छा लगा जिसको lady एक gent  के कान में फिल्म बता देती है। वह फिर अपने बाकी Gents के सामने इशारों से बताता है कि इस फिल्म का नाम क्या है?  और वह सारे कुछ समय के अंदर बताना होता है।
उसके बाद भांगड़ा हुआ और फिर एक सब की ग्रुप फोटो सारी फैमिली को एक तोहफा प्रेजेंट किया गया। तो  जब उसे खोल कर देखा तो उस में एक कप था, जिस पर सुबह की खींची हुई फोटो प्रिंटेड थी। यह सब आईडिया नीरज शर्मा जी Minda Corporation Quality Head  का था । अच्छा लगा , एक दूसरे से मिलकर, सभी जेंट्स एक दूसरे को जानते थे पर उनकी पत्नी और बच्चे एक दूसरे से मिले और उनको भी एक दूसरे को जानने का मौका मिला ।
ओशो कहते हैं दो शब्द होते हैं , एक Enjoyment और दूसरा Celebration.
Enjoyment है  कि
दूसरा आदमी डांस कर रहा कर रहा है,गीत गा  रहा है और हम उसको बैठकर सुन रहे हैं, देख रहे हैं।  Celebration है खुद नाचना, खुद हंसना। वैसे भी मॉडर्न जिंदगी में यह दो काम हम बहुत कम करते हैं।
असली खुशी भीतर है और हम बाहर ढूंढ रहे हैं।
फिर सभी ने Cat Walk की।
खुलकर हंसी मज़ाक हुआ, वहां पर फिर शाम की चाय कुल्हड़ में भी और फिर वापसी हो गई।
रास्ते कुछ बच्चे अपने हाथों में कुत्ता लेकर खड़े थे उसकी फोटोग्राफ मेरे बेटे ने ली।
#rajneesh_jass
24.02.2019
(sharing information From Google baba)
जेम्स ए. जिम कार्बेट (25 जुलाई 1875 - 19 अप्रैल 1955) आयरिश मूल के भारतीय लेखक व दार्शनिक थे। उन्होंने मानवीय अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा संरक्षित वनों के आंदोलन का भी प्रारंभ किया। उन्होंने नैनीताल के पास कालाढूंगी में आवास बनाया था। यह स्थान आज भी यहां आने वाले प्रर्यटकों को उस व्यक्ति के जीवन का ज्ञान कराता है जो न केवल एक शिकारी था बल्कि एक संरक्षक, चमड़े का कार्य करने वाला, जंगली जानवरों का फ़ोटो खीचने वाला तथा बढ़ई था। इन्होने उत्तराखण्ड के गढ़वाल जिले मे अनेक आदमखोर बाघों को मारा था जिनमें रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआ भी शामिल था। मगर बाद मे उनके विचार पलटने से और बाघों की घटती संख्या देखकर इन्होने सिर्फ छायाचित्रकारिता ही अपनाई।
जेम्स जिम कॉर्बेट
जिम कॉर्बेट
जन्म
25 जुलाई 1875
नैनीताल, यूनाइटेड प्रोविंस (अब उत्तराखंड), ब्रिटिश भारत (अब भारत)
मृत्यु
अप्रैल 19, 1955 (उम्र 79)
न्येरी, केन्या
राष्ट्रीयता
ब्रिटिश
व्यवसाय
शिकारी, प्रकृतिज्ञ, लेखक
जिम की प्रारम्भिक शिक्षा नैनीताल के ओपनिंग स्कूल से की बाद में सेंट जोसेफ कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नही होने के कारण पढाई बीच में छोड़कर 18 वर्ष की उम्र में मोकामा घाट (बिहार) जाकर वहाँ रेलवे में नौकरी करने लगे।[1]
जिम कार्बेट आजीवन अविवाहित रहे। उन्हीं की तरह उनकी बहन ने भी विवाह नहीं किया। दोनों भाई-बहन सदैव साथ-साथ रहे और एक दूसरे का दु:ख बाँटते रहे।
कुमाऊँ तथा गढ़वाल में जब कोई आदमखोर शेर आ जाता था तो जिम कार्बेट को बुलाया जाता था। जिम कार्बेट वहाँ जाकर सबकी रक्षा कर और आदमखोर शेर को मारकर ही लौटते थे।
जिम कार्बेट एक कुशल शिकारी थे। वे शिकार करनें में यहाँ दक्ष थे, वहीं एक अत्यन्त प्रभावशील लेखक भी थे। शिकार-कथाओं के कुशल लेखकों में जिम कार्बेट का नाम विश्व में अग्रणीय है। उनकी 'भाई इण्डिया' पुस्तक बहुत चर्चित है। भारत-प्रेम उनका इतना अधिक था कि वे उसके यशगान में लग रहते थे। कुमाऊँ और गढ़वाल उन्हें बहुत प्रिय था। ऐसे कुमाऊँ - गढ़वाल के हमदर्द व्यक्ति के नाम पर गढ़वाल-कुमाऊँ की धरती पर स्थापित पार्क का होना उन्हें श्रद्धा के फूल चढ़ाने के ही बराबर है। अत: जिम कार्बेट के नाम पर यह जो पार्क बना है, उससे हमारा राष्ट्र बी गौरान्वित हुआ है, जिम कार्बेट के प्रति यह कुमाऊँ-गढ़वाल और भारत की सच्ची श्रद्धांजलि है। इस लेखक ने भारत का नाम बढ़ाया है। आज विश्व में उनका नाम प्रसिद्ध शिकारी के रूप में आदर से लिया जाता।








Thursday, January 10, 2019

Journey To Ramgarh, Uttrakhand


Journey to  Ramgarh,  Uttrakhand
नए साल पर पूरे विश्व में पार्टियां हो रही हैं। हमारी कंपनी में शटडाउन था। हमें छुट्टियां थी तो हमने भी प्लान बनाया जाने का। रुद्रपुर से 80 किलोमीटर दूर रामगढ़ मुक्तेश्वर के रास्ते में। यहाँ ये बताना जरूरी है कि ये शोले फ़िल्म की शूटिंग हुई थी ।😂😂
  मैं घर से  निकला पंकज और विशाल गाड़ी में बैठ कर मेरा इन्तज़ार कर रहे थे। Jagwinder की कमी महसूस हो रही थी वो नहीं आ पाया क्योंकि उसकी factory working थी ।
चल दिए मुसाफिर पंकज की कार पर सफ़र पे। हल्द्वानी होते हुए, हम काठगोदाम पहुंचे। काठगोदाम से पहाड़ नज़र आते हैं । ऐसा लगता है कि मानो हाथ जोड़ कर नमस्कार कर रहे हों  "कि आइए स्वागत है आपका।"
 भीमताल होते हुए ऊपर पहुंचे तो एक दुकान पर चाय पी, अदरक और काली मिर्च वाली। वहां से कुछ फल फ्रूट लिए। रुद्रपुर से निकलते हैं हमने अमरूद भी लिए थे । सफ़र पर अमरूद  अच्छे रहते हैं।
 2:00 बजे चले तो लगभग 5:00 बजे के करीब हम रामगढ़ पहुंच गए। सूरज छुप गया था यहां पहाड़ी पर। कोहरे से घास पर बर्फ़ दिखाई दे रही थी। पंकज के चाचा ही  बहुत सारे फ्लैट है। वह दिल्ली में यह मकान सेल के लिए लगाए गए हैं। टू बैडरूम सेट रूम हीटर लगाया और कपड़े बदले ।खाने का ऑर्डर दिया बैठ गए गप्पे मारने। ठंड बढ़ गई , उस्ताद नुसरत फ़तेह अली खाँ की कवाल्लियाँ सुनी। पंकज के  blue tooth वाले speaker बहुत काम आये। Davinder Singh Bedi से अमेरिका  video call की। हमारी दोस्ती  1993 से है वो अमेरिका चला गया। उसकी एक खास चीज़ है कि उसका दिल दायीं तरफ़ है और बहुत बड़ा है। वो हम से लगातार touch में है।
 खाना खाकर हम 10:00 बजे बाहर निकले तो पहाड़ी पर थोड़ा सा ही घूमे थे और फिर हमने सूखी  झाडि़याँ  से आग लगाई, हाथ सेके । आग पर हाथ सेकने का अलग ही मज़ा है। सो गए। रात पंकज को एसिडिटी हो गई लगभग 2:00 बजे। मैनें उसका accupressure किया। अच्छा हुआ हमारे पास एक स्टील की बोतल थी रात को हमने उस्मी गर्म पानी करवा कर रखा था। गर्म ठंडा पानी मिक्स करके पिया तो पंकज को राहत महसूस हुई। हम सो गए। लगभग 4 डिग्री टेंपरेचर होगा।
 सुबह सुबह बाहर निकला देखा तो सामने हिमालय दिखाई दे रहा था। ये देखकर मन आनंदित हो गया। हिमालय बुद्ध पुरुष की तरह अकेला ही खड़ा है बांहे पसारे और भारत को बहुत सारे मौसम प्रदान करता है। फिर हमने फ्रेश होकर खाना खाया और निकल गए।  अरविंदो आश्रम यहां से 10 किलोमीटर था ।
  
जब स्वामी अरविंदो  पॉंडिचेरी में एक अश्रम बनाया यहाँ आज लगभग 5000 सन्यासी  रह रहे हैं और ध्यान कर रहे हैं ।
आदमी की जो परम दशा है वो पूरा खिल जाना है, जिसे हम बुद्ध कहते हैं।

अरविंदो आश्रम भी बहुत बढ़िया जगह बना हुआ है। वहां जाकर पता चला कि वह पूरे साल के लिए मेडिटेशन के लिए बुक है। थोड़ी देर  साइलेंट रुम में बैठकर मैंने मेडिटेशन की। वँहा एक सन्यासी मिला जो 11 साल से वंही है। वो उड़ीसा से था।
कुछ किताबें लीं और फिर हम निकल लिए वापस ।  भीमताल पहुंचे तो एक रेस्टोरेंट में खाना खाया । फिर  हम झील पर गए हमने वहां बोटिंग की।  सामने पहाड़ी पर एक मकान देख रहा था कि बहुत खूबसूरत था।बोट वाले लड़के  ने बताया कि यहां
"कोई मिल गया "
फिल्म की शूटिंग हुई थी। झील के बीच में Fish Aquarium  है उस में अलग-अलग किस्म की मछलियां हैं । बोटिंग करके वापस  शॉपिंग की ओर से हम 4:00 बजे के करीब रुद्रपुर की वापस पहुँच गए।
फिर मिलेंगे एक नए किस्से के साथ।  तब तक के लिए अलविदा ।
#rajneesh_jass
30.12.2018
Rudrapr
Uttrakhand

Friday, December 7, 2018

Poona journey with history and spirituality

 4.12.2018 to 8.12.2018
रेल एक  चलते -फिरते मकान की तरह होती है: जिसमें  लोग चढ़ते हैं, बैठते हैं ,बातें करते हैं, दोस्त बनते  हैं , किस्से बनते हैं, सफर करते हैं।

रेल से पुणे दोबारा जाना हुआ मुझे मेरा। इस बार  मेरे साथ मेरी फैक्टरी से नेमचंद भी थे।
पुण, महाराष्ट्र  पहुँच कर  हम विक्की के आटो में  शनिवारवाड़ा देखने गए। विक्की  बहुत दिलचस्प इंसान है जिसके बारे में मैं पिछली बार बता चुका हूँ।


 किला मराठों ने अंग्रेजो के खिलाफ 1740 में बनाया गया था । बाहर बहुत बड़ा गेट है और अंदर घुसते ही एक पुरानी तोप पड़ी है । बड़े-बड़े पत्थरों को काटकर चबूतरानुमा बनाया गया है । ऊँची ऊँची दीवारें हैं ,उनमें बहुत छोटे छोटे झरोखें हैं, जो कि सिपाहियों के लिए थे शायद। किले के बाहर , छत्रपति शिवाजी महाराज की एक बहुत ऊँची प्रतिमा है ,जिसमें वो घोड़े पर सवार हैं।
फिर हमने श्रीमंत  दगडुशेठ गणेश मंदिर देखा, उसमें  गणेश की बहुत सुंदर प्रतिमा  है। कहते हैं कि मंदिर में सोने और चांदी की नक्काशी है। बाहर दीवारों पर हाथी की खूबसूरत नक्काशी है । मंदिर में चढावे  के लिए खूबसूरत फूल मिलते हैं ।
फिर आगा खान पैलेस देखा।महात्मा गांधी जी को यंहा बन्धक बना कर रखा गया था। महल को अब संग्रहालय में बदल दिया गया है। महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी की बहुत सारी प्रतिमाएं हैं और बहुत सारी पुरानी तस्वीर में जिसमें वह बहुत सारे लोगों से मिल हैं, जैसे रविन्द्र नाथ टैगोर , आइँसटाईन के साथ । महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी की समाधि भी यँही है । हालांकि महात्मा गांधी जी की समाधि राजघाट दिल्ली में है । यहां पर बरगद के बहुत सारे पुराने पेड़ हैं,  जो कि बहुत पुराने हैं।
कुछ लोग मिले जो कि गुरु नानक देव जी के जपुजी साहब की पहली पौड़ी इक ओंकार सतनाम आप सुन रहे थे पर वह मराठे थे (जो रंग दे बसंती फिल्म से है)  मैंने पूछा हूं आपको ये समझ में आता है ? तो उन्होंने कहा बहुत कम आता है, पर बहुत अच्छा लगता है। मुझे भी लगा कि परमात्मा का नाम किसी भी भाषा में लिया जाए जिसके मन में श्रद्धा हो गई उसको समझ आ जाता है  चाहे उसे वह भाषण ना आती हो । फिर मैंने  उनको उसका मतलब समझाया।
एसवी राजु सर मिले। उन से मंत्रों और मुद्रा के बारे में बात हुई। पहले साईंस ने खोजा  सार कुछ  ठोस है , तरल है और गैस है। फिर बात आई कि सब कुछ ऊर्जा है। अब खोजा गया  कि सब कुछ तरंग
 (wave) है। जो हमें स्थूल नज़र आता है,  वह भी एक जगह  तरंगों का इक्ट्ठा हो जाना है।
हमें खास मुद्रा में बैठकर किसी खास मंत्र का उच्चारण करते हैं तो उसका हमारे शरीर पर प्रभाव होता है ।

ऑफिशियल काम हमने निपटाया। फिर अगले दिन सुबह ओशो आश्रम पहुंचा । वहां पर बुक स्टॉल पर माँ प्रतिभा (ओशो ने अपने सन्यासियों में औरत को माँ कहा  और आदमी को स्वामी ) से मुलाकात हुई जो कि 1984 से वंही रह यही हैं और वंही आश्रम  में काम कर रही हैं। उनको ज़ुकाम था। मैंने उसमें से परमिशन लेकर उनका अक्युप्रैशर  किया। ओशो की किताबें खरीदी, पलटू वाणी और बुक्स आई हैव लवड।
एक स्कूटर जो 1965 का माडल का था ,उस पर तस्वीर खींची। विक्की के आटो  में भी। वो हमेशा की तरह बिंदास था। इस बार उसकी लुक पूरी बदली हुई थी ।
 फिर वापस ट्रेन पकड़ कर वापस निकला।लोनावला होते हुए गुजरात से दिल्ली आए ।लोनावला  बहुत ही खूबसूरत है ,पहाड़ों से निकलती हुई ट्रेन। शायद इधर खंडाला भी है, यंहा बहुत सारी हिन्दी फिल्मों की शूटिंग होती है। बहुत ही मनमोहक दृश्य थे। इसके लिए किसी दिन लग से घूमने आना होगा ।
सुबह दिल्ली पहुंचे। तो दिल्ली से ट्रेन पकडी।
सामने सीट पर एक बुजुर्ग आदमी का गाने सुन रहा था
दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा के लूट गया
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छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए
ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए
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तू चीज़ बड़ी है
मस्त मस्त
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 मैंने कहा आप बहुत खूबसूरत गाने सुन रहे हैं जवानी के समय में आप बहुत रोमांटिक रहे होंगे? उन्होंने कहा ,नहीं ऐसा नहीं है। मेरी पत्नी मुझे छोड़ कर चली गई एक ऐसी जगह जहां से कोई वापस नहीं आता।
एक बेटी थी, उसकी शादी हो गई,  अब बिल्कुल अकेला हूँ तो ये गीत सुनता रहता हूँ। ऐसे लोगों से मिलकर लगता है,  ज़िंदगी बहुत कुछ सिखा देती है।
उनका नाम  दिनेश था ,उम्र 63 साल। वो मुझे अपना मोबाइल दिखाने लगे।

एक शेर याद आ गया
ना दोस्त के लिए
ना दुश्मनी के लिए
वक्त रुकता नहीं
किसी के लिए
# कवि नामालूम

एक चीज का फर्क मैंने देखा हमारे इधर नॉर्थ में रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल काफी है उसके मुकाबले पुणे में हमें एक ही दिखाई दिया ।लोग वहां साइकिल चलाते हैं । कई बुजुर्गों को मैंने साइकिल चलाते हुए देखा । पेड़ों से बहुत प्यार है ।उनको जो पेड सड़क के किनारे पर हैं उन पर रेडियम के रिफ्लेक्टर लगा रखे हैं जो के आने जाने वाले उनसे  ना टकराएँ।
हम जब लोनावला थे वहां पर कोई प्रदूषण नहीं था, पर जैसे ही गाड़ी के मुंबई के बाहर आई तो पॉलिथीन का ढेर , ऊंची ऊंची बिल्डिंग दिखाई देने लगीं। बस यही फर्क है परमात्मा की बनाई दुनिया और आदमी के बनाए संसार  में।

इस बार के सफर में चार लोगों को एक्यूप्रेशर सिखाया।
इस बार इतना ही।
फिर मिलेंगे एक नए किस्से के साथ।
तब तक के लिए आज्ञा दीजिए।
आपका अपना।
रजनीश जस
रूद्रपर
उत्तराखंड

Saturday, November 24, 2018

Tea With Rajneesh Jass 25.11.2018

अच्छा है दिल के पास रहे पासवान -ए अक्ल
पर कभी-कभी इसे तन्हा भी छोड़ दीजिए
# नामालूम

आज सुबह साइकिलिंग के लिए निकला। सुरजीत सर सैर करते हुए मिल गए । फिर हम पहुंच गए अपने चाय के ठिकाने पर ।
सर ने चाय के साथ फैन का ऑर्डर दिया। हम चाय पीने लगे । राजेश सर भी आ गए ।चाय के साथ फैन खाकर कॉलेज के दिन याद आ गए। और बातें शुरू हो गई बच्चों की , स्कूल की ,जिन्दगी की । मैंने कहा कि  जो लोग हमें धोखा देते हैं वह हमें जिंदगी का कुछ सबक सिखाना चाहते हैं। हमें अपने बच्चों को ये बताना है कि दुनिया में सिर्फ सीधे साधे लोग ही नहीं हैं:  बल्कि यंहा पर चोर भी हैं , ठग भी हैं। हमें हर तरीके  के लोगों  के साथ  रहने  का हुनर आना चाहिए।
जैसे एक कहानी ओशो कहते हैं कि एक शिष्य अपने गुरु के पास गया । गुरु ने कहा अगर तुम सचमुच में कुछ सीखना चाहते हो तो यह परीक्षा बहुत कठिन है। शिष्य ने हां कर दी । गुरु ने कहा, तुम्हें हमेशा जागते ही रहना है वह कभी भी डंडे से पिटाई  कर सकता है। एक  दिन शिष्य खाना खा रहा था गुरू ने पीछे से डंडे डंडे से पिटाई कर दी । फिर धीरे-धीरे वो शिष्य  सहर वक्त सावधान रहने लगा। गुरु के कदमों की आहट बाद उसे पहचानने लगा। समय बीतता गया। एक दिन उसका गुरु सर पर लकड़ियों के गठरी उठाए उठाए हुए आ रहा था किसी ने सोचा कि रोज मुझे तंग करता है आज देखते हैं ये खुद कितने पहुंचे हुए हैं  ।तो उसने झूठ दूर से ही एक डंडा मारा । गुरु ने लकड़ी की गठरी में से एक लकड़ी निकाली और उसके डंडे को साइट पर मार कर फेंक दिया । जिसे देख कर शिष्य बहुत हैरान हुआ । शिष्य ने पूछा ,आपको कैसे पता चला?  तो गुरु ने कहा जब तुम्हारे मन में यह विचार उठा ही था  तो तुरंत मैंने वह बात सुन ली थी ।

सुरजीत  सर  एक बात सुनाई कि उनके स्कूल में भी एक लड़का था जो पढ़ने में एवरेज था। उसे ड्राइंग का शौक था। स्कूल टीचर उसे उसके शौक  से मिलते जुलते काम सौंप देते थे जो कि उसके ड्राइंग के पैशन को पूरा कर रहे थे । फिर वो दिल्ली यूनिवर्सिटी चला गया ।अब उसकी एग्जीबिशन दुनिया के बहुत सारे देशों में लगती रहती है।
 तो गुरु का काम है के शिष्य के अंदर जो गुण है, उसे तराश कर बाहर निकालने में मदद करना।

मेडीटेशन, अमेरिका और भारत की संस्कृति पर लंबी बातचीत हुई।
राजेश सर से भी गपशप हुई। धूप में खड़े  होकर विटामिन डी लिया। फिर घर वापस ।
आज के लिए अलविदा ।
फिर मिलेंगे ।

Saturday, November 17, 2018

Cycling in Nature 18.11.2018

आइंस्टाइन ने कहा है , जीवन जीने के दो ढंग है
एक तो ये है  कि कुछ भी करिश्मा नहीं,
दूसरा ढंग  ये है  कि हर शै करिश्मा है ।

मेरे लिए :  सुबह उठना,  साँस लेना, दिल का धड़कना, सूरज को देखना ,साइकिलिंग करना ,नई नई बातें सीखना , आपको बताना भी करिश्मा है ।

आज सुबह उठा । गरम पानी में हल्दी डालकर पी,  लहसुन की फाँक निगली और चल दिया साईकिलिंग पर।
आप सोच रहें होंगे कि हल्दी?
जी हाँ,  हल्दी हमारे शरीर में से गंदगी साफ करके हमारे अंदर रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करती है। लहुसन की फाँक दिल के लिए बहुत अच्छी रहती है।
फिर पहुंच गया स्टेडियम।
 हेम पंत अपने दोनों बच्चों के साथ आए हुए थे और पंकज अभी पहुंच गया था।
फिर शुरू हुई बातें,  गपशप।
 अमेरिका में एक मोटिवेशनल गुरु है रोबिन शर्मा । उन्होंने क्लब बनाया है "5:00 a.m. क्लब" । उसमें वह बताते हैं कि सुबह उठ कर हम अगर घूमते हैं कुछ नया करते हैं तो हमें जिंदगी का नया अनुभव मिलता है।  लोग जो आलसी होते हैं सुबह उठते हैं और दफ्तर चले जाते हैं । उनकी ज़िंदगी मशीन जैसी हो जाती है।
पर जो लोग जिंदगी में कुछ नया अनुभव करना चाहते हैं, सुबह उठकर सूरज को देखते हैं,
 पेड़ों में पत्ते ,फूलों को देखकर  मुस्कराते हैं
 ठंडी गर्म हवाओं को महसूस करते हैं।
 रॉबिन शर्मा ने एक बार ये भी बात कही थी, अगर दिन में हम एक घंटा टीवी कम देखें, तो पूरे साल भर में 365 घंटे हमारी जिंदगी के बढ़ जाएंगे , बिना कुछ भी किए। उन 365 घंटों का हम क्या उपयोग करते हैं  ये हमारे ऊपर निर्भर करता है। अगर हम उसका सदुपयोग  करते हैं,  अपने आप को तराशने में लगाते हैं तो हमारी जिंदगी पूरी तरह से बदल सकती है ।

मैंने यह बात हेम पंत से की तो उन्होंने कहानी सुनाई।
 एक किसान था, उसकी बहुत सारी जमीन थी और उस में बहुत सारे लोग काम करते थे। पर वह कभी उनको देखने नहीं जाता था।
धीरे -धीरे खेती कम होने लगी उसे घाटा पढ़ने लगा। फिर उसको एक संत मिले। उन्होंने  बताया कि अगर वह सुबह सूरज चढ़ने से पहले एक सुनहरी चिड़िया को देखेगा तो उसके काम में बढ़ोतरी हो जाएगी । फिर वह सुबह उठकर खेतों में चक्कर लगाने लगा। उसने देखाककि खेतों में से अनाज चोरी हो रहा है, लोग काम नहीं कर रहे हैं ।उसने फिर लोगों को डांटना शुरू किया जो उसकी खेतों में मजदूर थे ।धीरे-धीरे वो खेती करने लगे और वह फिर दोबारा से अमीर हो गया।


उसने उस संत से पूछा कि वो सुनहरी चिड़िया तो मिली नहीं।
उस संत ने जवाब दिया,  सुबह उठना ही सुनहरी चिड़िया से मिलना था।
😊😊

 यह कहानी एक प्रतीक है हमें सिखाने के लिए।
 फिर पंकज से बातें हुई स्पेस के बारे में,  इस ब्राह्मंड की कैसे उत्पत्ति हुई? ऐसी सोच कर हम हैरान हो जाते हैं कि इस ब्राह्मण का कोई अंत नहीं है । यह पृथ्वी ब्राह्मंणड में पूरे मिट्टी के तिनके के बराबर है और उस ब्राह्मांड में हमारा अस्तित्व ना के बराबर ही है। यह भी क्रिश्मा ही है जो पहाड़ों में बर्फ पड़ती है तो वहां से ठंडी हवाएं नीचे मैदान में आकर ठंड कर दी है। जिंदगी को महसूस करने की शक्ति हमारी जितनी ही बढ़ती जाती है, हम उतना ही कुदरत के आगे नतमस्तक होते जाते हैं और उसका आनंद मनाते हैं ।

जापान में रह रहे भारतीय कवि और लेखक परमिंदर सोढी की एक हाईकु कविता है
"आएंँ अपने ही होने
का जश्न मनाएँ
कितना खूबसूरत है
हमारा होना"


आज के लिए इतना ही। फिर मिलूंगा,
 एक नए  किस्से के साथ।
 तब तक के लिए अलविदा।
#rajneesh_jass
Rudrapur
Distt Udham singh Nagar
Uttrakhand 

Sunday, November 11, 2018

#memories_goverment_polytechnic_bathinda_part_one

#कुछ_खट्टी_मीठी_यादें -1

बठिंडा पालीटेकनिक (1993-96) में नवतेज से दोस्ती हुई। उसका गांव घर होशियारपुर से कुछ दूरी पर माहिलपुर के पास सकरूली है।  मैं अक्सर उसके गांव जाता था। मुझे शौक था, पिछले दिन की सूखी रोटी मक्खन के साथ खाता। जब भी मैंने जाना तो नवतेज मजाक में अपनी मम्मी से कहता, "जितनी भी पुराने दिनों की रोटियाँ हैं,गांधी (मेरा होस्टल का नाम)  को दे दो, मक्खन के साथ।आंटी उसे टोक देते," कुछ शर्म करो तेरा दोस्त है।"

आज मक्खन के साथ रोटी खा रहा था तो ये याद आ गया।ये दुनिया के सबसे लजीज़ खाने में से एक है।
उसके घर के पीछे एक पेड़ पर बहुत सारे मोर थे,  अक्सर उनकी छत्त पर आ जाते। मुझे बहुत पसंद था वो पेड़। वो कहता "तेरी शादी कर देते हैं मोरनी से, यंही पेड़ पर रह जाना। "
बस ऐसे मजेदार मजाक होते।
शाम को सूरज छिपते ही चुल्हे पर बनी ताजी- ताजी रोटियाँ खाते। आठ बजे तक तो हम सो जाते।
खेत में जाकर मूली, गाजर खाते। भैंस को नल्के से पानी पिलाते।
ज्योति,  उसका छोटा भाई। उसे शौक था उसके पास  बुलेट मोटरसाईकल हो और वो उसे पूरे गाँव में घुमाए।

मैंने एक बार उनके नलके की मोटर खोल दी। फिर वो मुझसे दोबारा  फिट ना हुई।
मैं अपने घर  पुरहीरां,  होशियारपुर आ गया। जब अगली बार नवतेज के गांव गया तो नवतेज  जाते ही बोला, "और जो कुछ मर्जी करना पर नल्के को हाथ मत लगाना। पिछली बार नल्का माहिलपुर जाकर ठीक करवाया। तुम बहुत पंगे लेते रहते हो।"😁😂

सुबह को अंक्ल आंटी सुबह 4 बजे उठ जाते। सारा काम निपटा देते।
टेलीफोन पास की करियाने की दुकान पर आता था।  उस वक्त मोबाइल नहीं थे।
फिर नवतेज की शादी हो गई वो आस्टरेलिया चला गया।  मैं फिर भी उसके गाँव जाकर रहने आता।
नवतेज के आस्टरेलिया जाने से पहले बहुत किस्से हुए। वो अगली बार।
चलता।
बाकी अगली बार।
11.11.2017

#rajneesh_jass
Rudrapur
Distt Udham Singh Nagar
Uttrakhand
India