Saturday, September 14, 2019

#journey_to_poona_part_2

#journey_to_poona_part_2
#story_of_success
#common_man_struggle
27.09.2018

सुबह उठा तो तैयार होकर बजाज जाने के लिए निकल पड़ा ।एक ऑटो किया उससे बातचीत शुरू हुई तो वह भी दिलचस्पी से बातें करने लगा। उसका नाम  Vikram Chandrakant Motkar था, छोटा नाम विकी ।साउथ इंडियन टाइप मछें , स्मार्ट सा लड़का। वो अपनी कहानी सुनाने लगा। 7 साल की उम्र में उसके फादर उसे  हमेशा के लिए छोड़ कर चले गए थे। उसकी जिंदगी का संघर्ष वहीं से शुरू हो गया। उसने टाटा की कंपनी ज्वाइन करी जिसमें वह सफाई का करने लगा। उसके साथ के पढ़े हुए लड़के लड़कियां उसी ऑफिस में अफसर थे। वो उसको देख कर बहुत दुखी होते ,पर विक्की अपने काम में खुश रहता। सुबह सुबह दफ्तर में अपना सफाई करके और सब की  पानी की बोतल  में  पानी भरकर एक जगह पर बैठ जाता ।
एक दिन उस से एक काँच का गिलास टूट गया। गिलास टूटने का मतलब कि उसको फाइन होना था।  HR से फोन आया तो वहां डरता डरता पहुंचा।  वो बोला, मुझे जुर्माना कर दीजिए कि मुझसे गिलास टूट गया है। पर वो बोले, तुम यह बताओ कि जब तुम को दफ्तर में काम करने के बाद अलग से बैठकर क्या लिखते हो?  हमने सीसीटीवी में देखा है विक्की ने जवाब  दिया, कि मेरी माँ कहती है, कि अकेला मन शैतान का घर होता है तो उसको किसी काम पर लगा कर रखो। तो मैं एक कापी पर राम राम का नाम लिखता हूँ ।
उन्होंने कहा तुम्हें कल इस काम पर आने की जरूरत नहीं है ।विक्की घबरा गया, क्योंकि ये नौकरी उसके लिए बेहद ज़रूरी थी।
 उन्होने कहा, कल से तुम दफ्तर का एक दूसरा काम करोगे। कोरियर बांटना, फोटो स्टेट करने और ऐसे ओर  सारे काम। तुम्हारी सैलरी बढ़ गई है ।यह काम करने के लिए तुम्हें एक मोटरसाइकिल भी दी जाती है। वह बहुत खुश हो गया ।
फिर उसको एक लड़की से प्यार हो गया जो कि उससे ज्यादा पढ़ी लिखी थी। लड़की के पिता को वह लड़का पसंद नहीं था। विकी ने अपने दफ्तर में बात की तो सारा स्टाफ उसका लड़की के घर पर पहुंच गया ।लड़की के पिता बड़े हैरान हो गए कि सभी लोग कारों में उसके घर पर पहुंचे थे ।जब उन्होंने विकी के बारे में उनको बताया तो वह बहुत भावुक हो गए थे। वहां की एक प्रथा है  जमाई राजा के पैर लड़की की माँ पानी से पैर धोती है जो पहली बार घर आते हैं । फिर उसकी शादी हो गई उसकी बीवी ने उसको बहुत प्रेरित किया और आगे पढ़ने के लिए उसकी मदद की। कुछ महीने बाद उसके ससुर की एक जगह डेथ हो गई है ।वह मुझसे पूछ रहा था कि मुझे एक सवाल का जवाब चाहिए ,अगर कहीं परमात्मा है तो वह उससे वह हर प्यारी चीज क्यों छीन लेता है जो उसको अच्छी लगती है?
 मेरे पास भी इस बात का कोई जवाब नहीं था।
वो पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जी का बांसरी वादन भी सुनता है।
 फिर वह बताने लगा कि उसके पास तीन-तीन माँ है ,एक अपनी मां, एक मौसी और सासु माँ। मौसी का बेटा, जिसके पास बहुत पैसा है पर अपनी मांँ को वह देखता नहीं है, उसकी देखभाल भी विक्री ही कर रहा है।
 विक्की का एक सपना है कि उसका एक मकान हो उसको बहुत बड़ा मकान नहीं चाहिए। हम सबके भी कुछ ऐसे ही कुछ सपने हैं ।
मैंने दिल से दुआ की,  परमात्मा इसका सपना जल्दी पुरा कर।
वह बातें करता करता है बता रहा था कि सर जब जैसे - जैसे ही मंजिल करीब आ रही है तो मैं सोच रहा हूं कि आप थोड़ी देर में मेरे से जुदा हो जाओगे , जो कि उसे बिल्कुल अच्छा  नहीं लग रहा है।
फिर उसने रास्ते में मुझे नारियल पानी पिलाया। मैं पैसे देने लगा वह बोला ,अतिथि देवोभवः। वो Dog Breeding का काम करता है, फिर पार्ट टाइम आटो , Fruit Business और  साथ में नौकरी।

"13 साल कम्प्लिट  इन टाटा....

ऑफिस बॉय हाऊस किपिंग से  स्टार्ट किया आज कस्टमर सर्व्हिस सिनियर एक्सिकेटीव्ह..."

उसने मेरी मंजिल पर मुझे छोड़ा और फिर आगे बढ़ गया । उसने मेरा फोन नंबर लिया और फेसबुक पर मेरे को ज्वाइन किया ।शहर में मेट्रो ट्रेन बन रही है जिसके कारण तेरी जगह पर ट्रैफिक जाम भी हो रहा है। अलविदा शाम को भी एक किस्सा हुआ उसको फिर कहीं शेयर करूंगा दोबारा से अपनी यात्रा में।
#rajneesh_jass
Rudrapur
Uttrakhand

#journey_to_poona_part_1

#journey_to_poona_part_1
25.09.2018







आइए चलते हैं एक नई यात्रा पर। मुझे ऑफिशियल टूर पर पूना जाना था। बारिश  इतनी हो रही थी, कि पूछो मत ।
दुकान से कुछ बेसिक मेडिसिन  खरीद ली। इस बार यात्रा में एक नया एक्सपेरिमेंट किया गया, एक बनियान सिलाई गई जिसको पंजाबी में शायद पतूही कहते हैं ।उसके अंदर एक छिपी हुई जेब होती है, जो कि बहुत गहरी  होती है,  दो जेब सामने । यह पुराने समय में हमारे बुजुर्ग पहन के सफर करते थे।
बेटा रोकन बारिश में जाकर नमकीन के पैकेट लाया।  सिमरन  { मेरी धर्म पत्नी } ने सुबह के लिए परांठे पैक  किए, साथ गुड़ और सौंफ भी।
 जैसे तैसे करके रुद्रपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा। ट्रेन रानीखेत एक्सप्रेस पकड़ी। दो-तीन लोग और थे। उन्हें दिल्ली जाना था। वह मजाक करने लगे भाई साहब ,आप उठ गया तो उन्हें जगा देना। अगर हम  उठ गए तो हम आपको जगा देंगे। अगर कोई ना जागा, तो जैसलमेर पहुंच जाएंगे वहां घूम आएंगे। फिर सब सो गए रात को।  सुबह पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचा।
सुबह 4:00 बजे रेलवे स्टेशन बहुत सुंदर लग रहा था ।उसको लाइटों से ऐसे सजा रखा था, जैसे को दुल्हन ने दूल्हे के इंतजार में श्रंगार कर रखा हो। वहां से मैं नई दिल्ली आ गया। वो स्टेशन भी ऐसे ही सजा हुआ था। फोटो वहां पर  खींची ।इंतजार होने लगा  अगली ट्रेन का ।ट्रेन अपने निर्धारित समय से एक घंटा लेट थी ।नाश्ता किया ।  स्टेशन  के बाहर थोड़ी देर घुमा फिरा और फिर आकर बैठ गया ।ट्रेन आई तो चल दिए मुसाफिर मंजिल की तरफ । मैं हिंदी में अपने साथियों के साथ बात करने लगा ।वह बोले हम पंजाब से जाकर पूना रहने लगे हैं कोई बैंक एम्पलाई थे फिर तो हम शुरू हो गए भाई पंजाबी में। उसे खूब बातें हुई किस्से कहानियां पॉलिटिक्स बहुत कुछ । रात आई सो गए ।फिर अगले दिन मैं पुणे पहुंचे बहुत थक गया का फ्रेश हुआ नहाया खाना खाया।
नेशनल होटल रेलवे स्टेशन के बिल्कुल पास यह । बहुत पुराना होटल है बहाउल्ला इनके गुरु है जिनके  200 साल ही मना रहे हैं।
 शाम हो चुकी थी मैं निकला फिर थोड़ा सा टहलने ।कोरेगांव पार्क गया वह ओशो आश्रम बंद हो चुका था ।उन्होंने बताया कि उसे पार्क खुला हुआ है तुम्हें वही चला गया। वहां बहुत पुरानी पुरानी पेड़ थे ,बांस के और बहुत नायाब किस्म के फूल थे । युगल प्रेमी  एक दूसरे के हाथ में हाथ पकड़े घूम रहे थे ।महात्मा बुद्ध की दो मूर्तियाँ
 थी,  जो कि बेहतरीन नक्काशी  गई थी। फिर टहलता हुआ बाहर निकला तो देखा सड़क के किनारे एक साइकिल पड़ा था। यहां पर किराए पर साइकिल मिलते हैं ।उसके बार कोड को  मोबाइल से स्कैन करो और आप उसको पैसे पर करो तो ताला खुल जाता है ।यहां तक आपने जाना है जाएं और फिर वहां ताला लगा दें। पूरे शहर भर में ऐसी साइकिल पड़े हुए हैं ।एक अच्छी शुरुआत है ।

तभी बारिश होने लगी और आटो पकड़ के होटल आ गया ।रात का खाना खाया ।तो फिर होटल के मैनेजर से बात होने लगी उन्होंने अपने गुरु बहाउल्ला के बारे में बताया।
यह कॉम पूरे विश्व भर में है 5000000 लोग हैं।  यह लोग पूरे विश्व को एक मानते हैं ।
दिल्ली में लोटस टेंपल बनाया है ।उन्होंने मुझे कुछ किताबें पढ़ने के लिए दी। दीवार पर बहुत ही खूबसूरत  कलाक्रति थी। उन्होंने उसके बारे में बताया है कि यह भी एक नक्काशी की गई है।
मुझे सुबह उठकर कंपनी के काम जाना था तो फिर मैं आकर सो गया।
आगे है,  एक दिलचस्प आदमी के संघर्ष की कहानी।
#rajneesh_jass
Rudrapur
Uttrakhand
India

Tuesday, August 13, 2019

प्रेम की खोज

Love is to accept ourself as it is with good and bad habits.

Love is not to find "Perfect "
It is an art to see
" Imperfect "  " Perfectly".
"प्रेम" खुद को अपनी खूबियाँ और  कमजोरियों के साथ स्वीकार करना ही " प्रेम" है।

"प्रेम" किसी संपूर्णता की तलाश नहीं
बल्कि ,ये दूसरे इंसान की  अपूर्णता के साथ उसे पूरा का पूरा स्वीकार करना ही "प्रेम" है।

मीराबाईं अपने आप में पूर्ण है,
बुद्ध अपने आप में पूर्ण।
मीराबाईं , अगर बुद्ध होने की कोशिश करती, तो ना ही मीराबाईं बन पाती ना बुद्ध।
हम सब भी कुछ ना कुछ होने की कोशिश में रहते हैं, पर अपने जैसे नहीं। यँही सारी गल्ती है।
मैं अपनी बात कर रहा हूँ,  बाकी का नहीं कहा जा सकता।
ओशो कहते हैं,  हर एक इंसान अनमोल है,  अद्वितीय है, ना उसके जैसा इंसान पहले कभी इस धरती पर  हुआ है और  ना ही कभी होगा।  पर हमारा दुख ये है हम पूरा जीवन खो देते हैं,  बुद्ध जैसे होने में या मीराबाईं जैसे होने की दौड़  में।  हम अपना गुणधर्म लेकर पैदा हुए हैं और उसे ही तराशने पर जीवन सफल होगा।
# रजनीश जस
#rajneesh_jass
Rudrapur
Distt Udham Singh Nagar
Uttrakhand

Saturday, June 8, 2019

यात्रा गुरद्वारा नानकमत्ता साहब और पूर्णागिरी माता

 गुरद्वारा नानकमत्ता  साहब और पूर्णागिरी माता  का सफर
04.06.2019

कुछ दिन पहले नानकमत्ता जाना हुआ । घर पर मेहमान आए हुए थे साली शालू,  साँढू मिथिलेश और उनका बेटा रिधम ।  रुद्रपुर से निकले सारे लोग गाड़ी में । पेट्रोल डलवाया,  टायरों में हवा चेक करवाई। बेटा वंश और रिधम सीट के पीछे  डिग्गी में बैठ गए। मेरी धर्म पत्नी सिमरन,  शालू और  बेटा रोहन पिछली सीट पर,  मैं और मिथिलेश आगे। हम निकले तो अंधेरा हो चुका था। सितारगंज होते हुए हम नानकमत्ता गुरुद्वारा पहुंचे । एक बहुत बड़ा गेट जिससे हम अंदर जाकर देखा दुकानें सजी हुई है ।

 वहां पर नानकमत्ता गुरुद्वारा, जंगल में मंगल  है। 60 कमरे हैं जिनमें एसी लगे हुए हैं उनका कोई किराया नहीं है। जब भी आप जाएं वहां रह सकते हैं। बिना ऐसी वाले कमरे हैं , एक हॉल है  ऐसी श्रद्धा सिर्फ सिखों में ही देखने को मिलती है।
आइए कुछ जानते हैं,  सिख समुदाय के बारे में।
 नानक देव जी सिखों के पहले गुरू हैं।  उन्होंने  लंगर की प्रथा की शुरुआत की। उनके पिता मेहता कालू ने उनको ₹20 दिए और  कहा, जाओ सच्चा सौदा करो । वह शहर की तरफ निकले तो उन्होंने कुछ साधु देखें जो के भूखे थे। उन्होंने उन को खाना खिलाया और वापस आ गये। पिताजी ने कहा यह कौन सा सच्चा सौदा हुआ?  पर तब से लेकर आज तक लंगर की प्रथा चल रही है ।
खालसा एड करके एसोसिएशन ने जो भी पूरे संसार में काम करती है। सीरिया के बीच लड़ाई में उन्होंने जाकर लंगर लगाया , नेपाल में जब भूचाल आया वहां 800 के लगभग टीन के मकान बना कर लोगों  को दिए और वहां पर भी लोगों को लंगर खिलाया। जम्मू कश्मीर में , उड़ीसा में, कर्नाटका में जब भी कहीं कोई तूफान या भूचाल आ जाए  तो वहां पर बिना किसी के कहे हमारे सिख भाई खुद ही पहुंचकर लोगों की सेवा करते हैं। यही है सिखों का बड़प्पन।
इनका एक और भी रुप है, यह बहुत बहादुर कौम है । पाकिस्तान की लड़ाई में सिख रेजीमेंट ने जंग फतह की थी ।अभी कुछ दिन पहले " केसरी"  फिल्म रिलीज हुई है जिसमें एक सच्ची लड़ाई है,  कि 21 सिखों से 10 हजार मुसलमानों से युद्ध किया। चाहे वह सारे शहीद हो गए पर वह झुके नहीं। ऐसे ही इसराइल में  लड़ाई है यहां पर सिख रेजीमेंट है फतेह किया। महाराजा रंजीत सिंह के समय  सिखों का राज्य अफगानिस्तान  तक था।

 ओशो ने कहा है कि जब कभी , मान लो सारी दुनिया अगर तबाह हो जाए तो अगर एक सिख बचा रहा, तो तुम समझना के तुमने पूरी मनुष्यता को बचा लिया है। शेखर कपूर ने कहा था लड़कियों को कहा जाता है, अगर तुम कहीं मुसीबत में फंस जाओ तो तुम किसी भी सिख के पास पहुंच जाना वह अपनी जान देकर भी तुम्हारी रक्षा करेगा।
 गुरु गोविंद सिंह जी के समय पर भाई कन्हैया जी थे जो कि सिखों को मल्हम पट्टी का काम करते थे,  पर वो वह मुसलमानों में युद्ध के दौरान मलहम पट्टी कर देते  थे ।गुरु गोविंद सिंह जी के पास शिकायत पहुंच भाई कन्हैया  मुसलमानों को भी मलमपट्टी कर देते हैं  जो हमारे दुश्मन हैं। गुरु गोविंद सिंह जी ने उन्हें बुलाया तो भाई कन्हैया ने कहा, कि मुझे सभी में आप का ही रूप दिखाई देता है , मुझे कोई दुश्मन दिखाई ही नहीं देता। तो गुरु गोविंद सिंह जी ने कहा तो तुम अपने पास मश्क रखो और सभी को पानी पिलाया करो ।  भाई कन्हैया जी से अपनी इस काम के लिए हमेशा जाने जाएंगे और हमें अपने बच्चों को इस इतिहास के बारे में बताना चाहिए।

आईए लौटते हैं  अपनी यात्रा की तरफ। देर रात होने के कारण गुरद्वारा साहब के दरवाजे बंद थे हमने बाहर से माथा टेका और लंगर खाने चले गए। सारी संगत लंगर खा रहे थी। छोटे-छोटे बच्चे रोटियां बांटे थे जिसको भी पंजाबी में "प्रशादा" कहा जाता है । रोटी, चावल ,सब्जी , दाल और हल्वा ( हल्वा को पंजाबी में कड़ाह प्रशाद कहा जाता है)। लँगर खाने के बाद हमने ठहरने के लिए  कमरे का पता किया वहां कोई भी कमरा खाली नहीं  था। हम निकल लिए होटल ढूंढने। पर वहां बहुत छोटे से कमरा मिल रहा था,  जो सही नहीं  लगा। हम वापस गुरुद्वारा आए और उनको रिक्वेस्ट किया। उन्होंने हमें दो गद्दे दिए और हम जाकर लेट गए  दूसरे माले पर खुले आसमान के नीचे । सितारों को देखते हुए अलग अनुभव हो रहा था। सुबह 4:30 का अलार्म लगा कर सो गए । पहले तो हवा चलती रही फिर रात गरम भी हो गई। जब सुबह हुई तो फिर हम नहा धो कर माथा टेकने गए। शब्द लगा हुआ था
"किस नाल कीजे दोस्ती
सब जगह चलनहार"
  यह शब्द गुरु नानक देव जी की गुरबाणी से लिए हुए हैं। इसका मतलब है, हे परमात्मा मैं किस से दोस्ती करूँ क्योंकि सारा जग तो एक दुनिया से विदा हो जाएगा। कोई ऐसा दोस्त हो जो सदा मेरे साथ रहे।
गुरुद्वारे के पीछे एक सरोवर हैं वहां बहुत सारी मछलियां है। एक तरफ एक नल का है उसका पानी लोग प्रसाद की तरह लेते हैं। फिर एक पीपल का पेड़ है जो कि बहुत पुराना है इसका भी गुरु नानक देव जी के साथ जुड़ाव है।
 फिर हमने वहां से प्रशाद लिया और फिर निकल गया पूर्णागिरि के लिए। पूर्णागिरी माता की यँहा पर बहुत मान्यता है। गर्मियों की छुट्टियां हैं लोग डीजे लगाकर नाचते गाते हुए जा रहे थे ।रास्ते में शारदा नदी देखी जिसका  बहाव बहुत तेज है।    लोगों के घरों में कटहल, आम और लीची के पेड़ लगे हुए हैं। मिट्टी के घर बने हुए थे। हम सुबह 10:00 बजे पूर्णागिरी की चढ़ाई शुरू की । इर्द गिर्द  दुकानें लगी हुई थी। धूप होने के कारण पानी की बोतलें हम साथ लेकर चल रहे थे ।पहाड़ी के शिखर पर ये मंदिर है। वहां पर माथा टेका और फिर वापस हो लिए। रास्ते में खाना खाया। फिर चल दिए मुसाफिर।
 फिर शारदा नदी में बहाव बहुत तेज था ।बस पानी में पैर डाले । पानी ठंडा था और फिर वहां से हम निकल लिए सिद्ध बाबा मंदिर नेपाल की तरफ। हमें बता दिया गया था कि पैसे पहले ही निकलवा कर लेना ।तो आ एटीएम से पैसे निकलवा लिए । टनकपुर से बिल्कुल साथ में ही हो जगह है वहां पर अपनी गाड़ी पार्क की और वहां से टुकटुक लेकर डैम तक पहुंचे। यह डैम से थोड़ी दूर तक पैदल जाना पड़ता है। फिर वहां पर मोटरसाइकिल पर दोनों सवारीयाँ ले जा कर  कुछ दूरी तक छोड़ देते हैं। वहां से फिर  सिद्ध बाबा का का मंदिर है। आर्मी वाले वहां पर दोनों तरफ लोगों का सामान चेक करते हैं ।हमें मंदिर में माथा टेका । वहां एक के पीछे एक करके तीन मंदिर हैं। एक पुजारी ने कहा है यह सिद्ध बाबा का मंदिर है यहां पर जो मांगना है मांग लो। मैंने कहा उसने तो बहुत कुछ दे रखा है तो शुक्र करने आए हैं। मेरी तरफ देख रहा था ।





यहां पर पीले रंग के कपड़े के ताबीज की तरह बाँध रखे हैं, जिसकी तस्वीरें  खीँची जो कि बहुत ही सुंदर लग रहे थे । पूर्णागिरि में यह लाल धागे होते हैं ,इनको देख कर अलग सी खुशी भी महसूस होती है।
जब हम वापस आने लगे तो वहां पर बादल हो गए। जब हम पैदल डैम तक पहुंचे बारिश होने लगी । हम पुलिस पोस्ट पर रुक गए। भयंकर बारिश हुई और ओले पड़ने लगे । इक टीन की छत्त के नीचे खड़े हो गए पर हम  पूरे  भीग गए।  बच्चों को बहुत डर लगने लगा ,पुलिस वालों को रिक्वेस्ट करके हमने बच्चों को छत के नीचे पुलिस फोर्स वालों के पास  भेज दिया। पुलिस वालों ने हमारी बहुत मदद की। हमें बारिश रुकने तक के लिए उन्होंने आगे जाने से मना किया, हम रुक गए। फिर उन्होंने टुकटुक वाले को फोन करके  बुलाया और हम  वापस आ गए।

आते हुए हमने उन पुलिस वालों का धन्यवाद किया। फिर हम निकल गए वहां से टनकपुर। हम नानकमत्ता जाने की सोचने लगे पर रास्ते में बहुत सारे पेड़ टूटे हुए थे, बिजली गुल थी। फिर बनबसा में एक होटल में हम रुके। भीगे कपड़े बदले। खाना खाया और फिर सो गए। फिर सुबह हम निकलिए रुद्रपुर के लिए।

फिर  मिलेंगे एक नयी यात्रा में।
आपका अपना
रजनीश जस 

Sunday, June 2, 2019

बेल का शरबत

26.04.2019
आइए आज आपको बेल का शरबत पिलाते हैं। बेल एशियन देशों में पाए जाने वाला 10 से 13 मीटर ऊंचा पेड़ है। इसके पत्तों की से शिवजी की पूजा की जाती है । माना जाता है इसमें शिव का वास है। आमतौर पर बेल का पेड़ मंदिरों में लगाया जाता है । इस पर कांटे भी होते हैं।
नेपाल में इसका फल लड़कियों को दिया जाता है और यह वहां पर यह मान्यता है कि इसका फल अगर नहीं टूटता, उतने दिन तक वह लड़की सुहागिन रहती है।
आईए मुड़ते हैं  बेल के शरबत पर। यह पेट की बीमारियों, बवासीर, अल्सर, भूख ना लगने जैसी बीमारियों पर खाया जा सकता है।
शरबत बनाने के लिए इसके फल की सख्त खोल को तोड़ कर उसे से गुद्दा निकाला जाता है।  उसके चीनी का पानी डालकर उसे घुमाया जाता है , उसे छननी से छानकर बीज अलग किए जाते हैं। ऐसे मीठा शरबत तैयार होता है।  इसमें विटामिन ए और विटामिन सी बहुत मात्रा में पाया जाता है।
रुद्रपुर में यह आमतौर पर किस जगह से हिल जाता है ।  गर्मियों की इस चिलचिलाती धूप में  एक बार में एक बार रुके, बेल का शरबत पीएँ। 
तस्वीर में इस भाई साहब का नाम किशन लाल है। यह पीलीभीत यूपी से हैं और यहां पर बेल का शरबत , नींबू पानी, सोडा पानी, जलजीरा एक ही रेहड़ी पर इतनी वैरायटी रखे हुए हैं । यह सिडकुल से को आवास विकास  की तरफ आते हुए रास्ते में है।

 दूसरी एक रेहड़ी भगत सिंह चौक पर भी है । यह वह लोग हैं जिनका नाम कभी कहीं नहीं आता,  पर हमारे यह लोग मेहनत करके एक स्वाद पैदा करते हैं तो चलिए इनका भी शुक्र करते हैं।
मैं इन लोगों को के बारे में इसलिए भी लिखता हूँ कि वह लोग हैं यू कोल्ड ड्रिंक के इस दौर में हमारे भारत का स्वाद जिंदा रखे हुए हैं। वर्ना कोल्ड ड्रिंक कंपनियों और पिज्जा के मालिक वे लोग हैं अगर इनका बस चले तो सुबह से लेकर शाम तक की उपयोग होने वाले पानी , घर की बनी रोटी,  दाल, हवा सब कुछ हमें डिब्बों में पैक करके बेचें और करोड़ों रुपया कमाएँ।
आज के लिए अलविदा , फिर मिलूंगा एक नए किस्से के साथ।
रजनीश जस
#rajneesh_jass
Rudrarpur
Uttrakhand

ਐਲਡਸ ਹਕਸਲੇ ਦਾ ਨਾਵਲ ਨਵਾਂ ਤਕੜਾ ਸੰਸਾਰ ਤੇ ਮੌਜੂਦਾ ਜੀਵਨ

ਗਲੀ ਵਿਚ ਇਹ ਤੌਲੀਏ ਬਿਕਣ ਆਏ 80 ਰੁਪਏ ਕਹਿ ਰਿਹਾ ਸੀ  ਤੇ 50 ਦੇ ਵੇਚ ਗਿਆ। ਹੱਥ ਨਾਲ ਬਣੇ ਇਹ ਜੇ ਕੀਤੇ ਸ਼ੋਰੂਮ ਤੇ ਹੋਣ ਤਾਂ ਕਿੰਨੇ ਮਹਿੰਗੇ ਵਿਕ ਜਾਣ? ਕਈ ਲੋਕਾਂ ਨੇ 30 ਰੁਪਏ ਵਿਚ ਵੀ ਖਰੀਦੇ।
ਉਹ ਦੱਸ ਰਿਹਾ ਸੀ ਕੇ ਇਹ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿਚ ਜ਼ਨਾਨੀਆਂ
 ਬਣਾਉਂਦੀਆਂ ਨੇ ਤੇ ਉਹ ਸ਼ਹਿਰ ਆਕੇ ਇਹ ਵੇਚਦੇ ਨੇ।
ਇਹ ਸਭ ਵੇਖਕੇ ਮੈਨੂੰ " ਮ੍ਹਟਰੂ ਬਿਜਲੀ ਕਾ ਮੰਡੋਲਾ "ਫਿਲਮ ਦਾ ਡਾਇਲਾਗ ਯਾਦ ਆ ਗਿਆ
ਖਾਲੀ ਜਗ੍ਹਾ ਵੇਖਕੇ ਇਕ ਮੰਤਰੀ ਕਿਸੇ ਇੰਡਸਟਰੀ ਵਾਲੇ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਦਾ ਹੈ ਇਥੇ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀਆਂ ਫੈਕ੍ਟਰੀਆਂ ਲੱਗ ਸਕਦੀਆਂ ਨੇ। ਦੂਜਾ ਕਹਿੰਦਾ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ ਲੋਕ ਕੰਮ ਕਰਕੇ ਅਮੀਰ ਹੋ ਜਾਣਗੇ । ਤਾਂ ਪਹਿਲਾ ਹੱਸਕੇ ਕਹਿੰਦਾ ਹੈ, ਨਹੀਂ ਅਜਿਹਾ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇਗਾ ਅਸੀਂ ਲਾਗੇ ਇਕ ਬਿਗ ਬਾਜ਼ਾਰ ਬਣਾਵਾਂਗੇ ਉਥੇ ਅਜਿਹਾ ਸਮਨ ਵੇਚਾਂਗੇ ਜੋ  ਕੇ ਪੈਸੇ ਘੁੱਮ ਫਿਰ ਕੇ ਸਾਡੀ ਝੋਲੀ ਵਿਚ ਹੀ ਆ ਜਾਏਗਾ ।

ਇਹੀ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਅੱਜਕਲ ਟੈਕਸੀ ਅਸੀਂ ਮੋਬਾਈਲ ਤੇ ਬੁਕ ਕਰਦੇ ਹਾਂ , ਹੁਣ ਆਨਲਾਈਨ ਖਾਣਾ ਬੁੱਕ ਕਰਕੇ ਘਰ ਮੰਗਵਾ ਲੈਂਦੇਹਹਾਂ। ਹਰ ਚੀਜ਼ ਬੈਠ ਬਿਠਾਏ ਹੋਣ ਲੱਗ ਪਈ ਹੈ ।
ਹੌਲੀ ਹੌਲੀ ਅਸੀਂ ਮਸ਼ੀਨ ਨਾਲ ਇੰਨੇ ਘਿਰ ਗਏ ਹਾਂ ਕੇ ਇਸ ਬਿਨਾ ਜੀਉਣਾ ਬਹੁਤ ਔਖਾ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ।
ਮੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਆਉਂਦਾ ਹੈ ਮੈਂ ਦਸਵੀ ਕਲਾਸ ਚ ਅਲਡੈਸ  ਹਕਸਲੇ  ਦਾ ਨਾਵਲ "ਨਵਾਂ ਤਕਡ਼ ਸੰਸਾਰ ਪੜ੍ਹਿਆਂ ਸੀ । ਮੈਂ ਇੰਨਾ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੋਇਆ ਕੇ ਕਈ ਦਿਨ ਤਕ ਇਕ ਅਜੀਬ ਸੋਚ ਵਿਚ ਡੁੱਬਾ ਰਿਹਾ ।
ਇਹ ਨਾਵਲ ਅੱਜਕਲ ਸਾਰਥਕ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਇਸ ਨਾਵਲ ਵਿਚ ਬੱਚੇ ਟੈਸਟ ਟਿਊਬ ਵਿਚ ਪੈਦਾ ਹੋ ਰਹੇ ਸਨ । ਇਕ ਬੰਦਾ ਇਹ ਸਭ ਵੇਖਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਲੋਕ ਖੁਸ਼ ਹੋਣ ਲਈ ਸੋਮਾ ਨਾਮ ਦੀ ਦਵਾਈ ਖਾਂਦੇ ਨੇ।  ਇਕ ਮਜ਼ਦੂਰ ਕਲਾਸ ਹੈ , ਇਕ ਮੈਨੇਜਰ।  ਜੇ ਮੈਨੇਜਰ ਕਿਸੇ ਮਜ਼ਦੂਰ  ਦੇ ਥੱਪੜ ਵੀ ਮਾਰ ਦੇਵੇ ਤਾ ਉਹ ਵਿਰੋਧ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ ਸੀ ।
ਉਹ ਬੰਦਾ ਕਹਿੰਦਾ ਇਹ ਤਾ ਸਹੀ ਨਹੀਂ ਤਾ ਉਹ ਡਾਕਟਰ ਕਹਿੰਦਾ ਇਸ ਨਾਲ ਸ਼ਹਿਰ ਚ ਸ਼ਾਂਤੀ ਬਣੀ ਰਹੇਗੀ ।ਉਹ ਸਭ ਡਾਕਟਰ ਨਾਲ ਬਹਿਸ ਕਰਦਾ ਹੈ।
ਆਖਿਰ ਵਿਚ ਉਹ ਆਦਮੀ ਨੂੰ ਗੋਲੀ ਮਾਰਕੇ ਮਾਰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
 ਇਹ ਨਾਵਲ ਲਗਭਗ 1910 ਚ ਲਿਖਿਆ ਗਿਆ ਸੀ ਪਰ ਅੱਜ ਵੀ ਇਹ ਓ ਹੀ ਸਾਰਥਕ ਹੈ ।
ਮੈਂ ਨਿਰਾਸ਼ ਨਹੀਂ ਹਾਂ ਬੱਸ ਇਹ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ ਜਦ ਵੀ ਹੇਠ ਦੇ ਕਾਰੀਗਰ ਸਮਾਂ ਵੇਚਣ ਤਾ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਵਾਜਿਬ ਦਾਮ ਦਿਓ ।
ਅਸੀਂ ਬਿਗ ਬਾਜ਼ਾਰ ਜਾਕੇ ਬਰਾਂਡਿਡ ਸਾਮਾਨ ਖਰੀਦ ਦੇ ਹਾਂ ਜਿਸ ਨਾਲ ਪੈਸੇ ਕੁਝ ਹੱਥਾਂ ਵਿਚ ਹੀ ਹੋਕੇ ਰਹਿ ਗਿਆ ਹੈ ।
ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਆਲੇ ਦੁਆਲੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ  ਵੇਖਦਾ ਹਾਂ,  ਪਤੀ ਪਤਨੀ ਦੋਵੇ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਰ ਰਹੇ ਨੇ। ਪੈਸੇ ਜੋੜਣ ਲਈ
20 ਸਾਲ ਮਕਾਨ ਦੀਆਂ ਕਿਸ਼ਤਾਂ,  ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਪੜ੍ਹਾਈ ਦੇ ਚੱਕਰਵਿਊ ਚ ਫਸਿਆ ਮੱਧ ਵਰਗੀ ਪਰਿਵਾਰ।

ਪੈਸੇ ਆਉਂਦਾ ਤਾ ਹੈ ਪਰ ਘੁੱਮ ਫਿਰਕੇ ਫਿਰ ਸਰਮਾਏਦਾਰ ਦ ਹੱਥਾਂ ਵਿਚ ਚਲਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।

ਫਿਰ ਵੀ ਮੈਂ ਚੰਗੇ ਭਵਿੱਖ ਦੀ ਕਾਮਨਾ ਕਰਦਾ ਹਾਂ।

ਰਾਵਿੰਦਰਨਾਥ ਟੈਗੋਰ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇ ,
"ਹਰ ਨਵਾਂ ਜੰਮਦਾ ਬੱਚਾ ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਪ੍ਰਤੀਕ ਹੈ ਕਿ ਪ੍ਰਮਾਤਮਾ ਨਿਰਾਸ਼ ਨਹੀਂ ਹੈ।"
ਸੋ ਅਸੀਂ ਵੀ ਉਮੀਦ ਰੱਖਿਏ ਚੰਗੇ ਵਰਤਮਾਨ ਦੀ, ਵਰਤਮਾਨ ਦੀ ਕੁੱਖ ਚ ਜੰਮ ਰਹੇ ਭਵਿੱਖ ਦੀ ।

ਇਕ  ਗੀਤ ਦੀਆਂ ਕੁਝ ਸਤਰਾਂ ਯਾਦ ਆਉਂਦੀਆਂ ਨੇ

ਇਨ ਕਾਲੀ ਸਦਿਯੋੰ ਕੇ ਸਰ ਸੇ
ਜਬ ਰਾਤ ਕਾ ਆਂਚਲ ਢਲਕੇਗਾ
ਜਬ ਅੰਬਰ ਝੂਮ ਕੇ ਨਾਚੇਗਾ
ਜਬ ਧਰਤੀ ਨਗ਼ਮੇ ਗਾਏਗੀ
ਵੋ ਸੁਬਹ ਕਭੀ ਤੋਂ ਆਏਗੀ
ਵੋ ਸੁਬਹ ਕਭੀ ਤੋਂ ਆਏਗੀ

#ਰਜਨੀਸ਼ ਜੱਸ
ਰੁਦਰਪੁਰ
ਉਤਰਾਖੰਡ
#rajneesh_jass



Wednesday, April 17, 2019

Journey to Delhi Nizzamuddin and Osho Ashram Pune Part -2


 यूं तो मैंने ओशो की दीक्षा 1997 में ली थी। उस वक्त इतनी समझ नहीं थी। ओशो कहते हैं जिंदगी में ऊपर उड़ने के लिए  दो पंख जरूरी हैं, उसमें से एक पंख ध्यान का है दूसरा पैसे का है । वह कहते हैं  संसार से भागना नहीं , बल्कि जागना है। संसार से भाग कर जाओगे भी कहां?  जहां हो वही काम करो, क्रोध आएगा काम आएगा, उस में रहोगे हुए  तभी तो उस से पार जाने का रास्ता मिलेगा।

 ओशो आश्रम अंतरराष्ट्रीय लेवल का है। यहां पर हर एंटरी डिजिटल  पास से होती है। पूरा आश्रम ऊंचे ऊंचे पेड़ों से घिरा हुआ है। वहां पर कई सन्यासी रहते हैं जो वहीं आश्रम में ही काम करते हैं। पूरी दुनिया भर के लोग यहां पर आते हैं। यँहा पर फोटो खींचना मना है । मेर फोटो आश्रम के बाहर मेन गेट पर है।  बाकी दो  गूगल बाबा से ली गई हैं।

 मैनें वहां पर एंटरी की । मैरून और सफेद चोला खरीदा। हम लगभग 12 लोग थे, दो न्यूजीलैंड से,  बाकी हम भारतीय। उन्होंने हमें आश्रम के नियमों के बारे में बताया और दिन की होने वाली मेडीटेशन की विधियों के बारे में बताया। हमारे बिल्कुल पास ही मोर गुज़रा तो देखता हूंँ ओपन डांस चल रहा है। वहां थोड़ी देर डाँस किया ।
 वहां इतना कुदरती माहौल था कि आश्रम के अंदर मोर घूम रहे थे ।जब हम चाय पी रहे थे तो हमारे बिल्कुल पास से मोरत् गुज़रा। हर जगह पर सारे हैं अंदर स्विमिंग पूल है, हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, ओशो की राल्स रॉयस कार खड़ी है।





उसके बाद में बुद्धा हाल मेडिटेशन करने के लिए  गए। ये हाल ब्लैक मार्बल का बना पिरामिड है । इसमें हजार के लगभग लोग एक ही समय मेडीटेशन कर  सकते हैं। उसके बाद मैंने खाना पीना खाया और  एक मेडिटेशन  चक्रा साऊंड की। यह ध्यान  करते हुए  पूरा शरीर चार्ज  सा हो गया था। बिल्कुल अलग किस्म का अनुभव था । हमने फिर कुंडलिनी मेडिटेशन की। थोड़ी देर बाद में शाम की ओशो दर्शन हुआ। उसने सभी लोग सफेद रंग का चोला पहन कर आते हैं । ओशो का प्रवचन सुना।  उन्होंने कहा है जीवन में एक ही दुरभाग्य है,  खुद को जाने बिना यहां से संसार से विदा हो जाना । ओशो का सपना रहा है वो कम्यून बनाएं यहां पर लोग आजादी से रह सकें। दुनिया भर के आज तक जितने भी बुद्ध पुरुष  या बुद्धत्व औरतें हुई हैं,  उन पर सब पर उन्होंने अपने प्रवचन दिए हैं । बुद्ध, मीरा,  कबीर ,  जराथुस्तरा , लाओत्से , राबिया, गुरु नानक देव जी पर प्रवचन दिए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा उन्होंने बुद्ध को ही सराहा है। उन्होंने कहा जैसे आसमान में सितारे तो बहुत है पर ध्रुवतारा एक है, ऐसे ही बुद्ध हैं।  बुद्ध कभी
आस्तिकता या नास्तिकता की बात नहीं करते। वह कहते हैं तुम स्वयं जानो।  " अप्प दीपो भव:।
 ओशो का यही संदेश है, उत्सव हमार जाति आनंद अमार गोत्र। उन्होंने कहा  ये सब कुछ सूरज,  पृथ्वी, चांद , सितारे ,फूल, एटम ,इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन , सब उत्सव में हैं। उन्होंने कहा, अगर जब कभी दुनिया में वर्ल्ड वार मूवी हो गई, अगर कहीं अटम बम गिर भी रहे होंगेततो भी मेरे सन्यासी नीचे जीवन का उत्सव मना रहे होंगे।

 ओशो (1931 -1990) का जन्म मध्य प्रदेश, कुचवाड़ा के  परिवार में  हुआ। उनका बचपन अपने नाना नानी के पास बीता । वह बचपन से ही बहुत शरारती थे। जिस काम के लिए मना करना उसी काम को करना ।  जबलपुर यूनिवर्सिटी में फिलासफी के प्रोफेसर बने ।
 उन्होंने पूरा भारत भ्रमण किया, बहुत सारा लिटरेचर पढ़ा। फिर जब बुद्धत्व को उपलब्ध हुए तो अमेरिका में गए । वहां ओरेगन  में 5000 एकड़ में उनके सन्यासियों ने एक बंजर ज़मीन को पूरे पेड़ों की भरी जमीन कर दिया और मेडीटेशन करने लगे । अमेरिका  की हथियार बनाने वाली कंपनियों  को यह डर हो गया  अगर उसके लोग सन्यासी हो गए थे, वो पूरे विश्व में हथियार कैसे बेचेंगे ?

ओशो का बोलना ऐसा था कि कोई भी मंत्रमुग्ध हो जाता था ।  ओशो को शुक्रवार रात को गिरफ्तार कर लिया। पूरा मीडिया इसके लिए उनके पीछे हो गया । शनिवार को कोर्ट बंद थी और रविवार को भी। इसी दौरान उन्होंने ओशो को थेलियम नाम का जहर दिया। उसके बाद अमेरिका  छोड़ दिया और पूरी दुनिया भर में घूमे। अमेरिका में जिन जिन देशों को कर्जा ले रखा था उनको धमकियां दी कि कोई शरण ना दे । फिर ओशो भारत आ गए और मुंबई में प्रवचन देने शुरू किए । फिर उसके बाद में पूना आ गए। पूणे में फिर यह कोरेगांव पार्क में ओशो का आश्रम बनाया। उसने ओशो ने  ओशो कम्युन का नाम दिया। 

उनका बचपन का नाम चंद्र मोहन जैन  था । फिर उन्होंने नाम रजनीश रखा । उसके बाद में ओशो कर दिया। उन्हें लगभग 600 किताबें लिखी । सदी के सबसे बड़े फ्राइड और जुंग को लेकर ध्यान की नई नई विधियाँ बनाईं। इसमें आधुनिक मनुष्य को सहज और सरल होने की मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

कुछ दोस्त मिले वहां पर उसे मोबाइल नंबर आदान प्रदान किया। रात को 9:30 बजे वहां पर एक सेलिब्रेशन थी जो कि रात के 11:15 तक चलनी  थी।  मैंने वह नहीं की । फिर मेरा दोस्त बलविंदर आ गया उसके साथ पुणे के गुरुद्वारे में गए,  वहां माथा टेका और लंगर खाया । ये गुरुद्वारा मिलिट्री एरिया में बना हुआ है । तो इसको हॉलीवुड स्टाइल कहते हैं,  बहुत ही बढ़िया बिल्डिंग बनी हुई है। फिर रात को सो गया। सुबह कंपनी के काम बाजाज पहुंचा। एसवी राजू सर से मुलाकात हुई उनको एक मैगजीन अहा जिंदगी मैंने गिफ्ट की । गपशप हुई।  किस्से कहानियां सुनाए। उन्हें एक बात बहुत पसंद आई  जो उनको सुनाई थी,  "हम सब गटर में गिरे हुए लोग हैं और कुछ लोगों की आंखें सितारों पर है।"
 महाराष्ट्र में चाय को "चहा" कहा जाता है । मैंने  एक रेहड़ी से  चाय पी, नहीं नही 😊, " चहा " पी।
 फिल्म "तीसरी कसम" में राज कपूर साहब चाय को चहा ही  बोलते हैं। इस फिल्म में वो बैलगाड़ी वाले बने  हैंऔर वहीदा रहमान की डांसर है। जिस बिहारी अंदाज़ से वो "चहा"  बोलते हैं तो मज़ा आ जाता है।  यह फिल्म अपने गीतों के लिए बहुत मशहूर हुई थी  जैसे,  पान खाए सैयां हमार, सांवली सुरतिया होठ लाल लाल ,सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना है , चलत मुसाफिर मोह लिया रे पिंजरे वाली मुनिया।

वहां पर एक आदमी से मुलाकात भी हुई  वो नेहरू टाइप टोपी पहन कर बैठे थे। जब मैंने फोटो खींची तो वो मूछों को ताव देने लगे । महाराष्ट्र में  बड़ा  पाव,  सांभर बड़ा, इडली डोसा इत्यादि  बहुत मिलता है । सुबह का नाश्ता लोग इसी से करते हैं जो कि ये जल्दी पच जाता है, सस्ता भी है और आसानी से मिल भी जाता है।

 कंपनी के काम बाजाज में पूरे दिन रहा। वहां पर अमित महाजन से मुलाकात हुई उसके साथ पंजाबी में बातें की तो बहुत खुश हुआ। शाम को फिर वापसी हो गई।  फिर अपने होटल में आ
गए । अगले दिन सुबह 5:15 बजे ट्रेन थी पुणे से दिल्ली । फिर निकले मुसाफिर ट्रेन में दिल्ली के लिए। मेरे साथ ट्रेन में एक जैनी और एक फौजी था।  बाकी सीटों पर  3 लड़के थे। एक तो सिर्फ लैपटॉप से चिपका हुआ, बाकी दो  मोबाइल से । मैंने फौजी को बताया कि मैं एक कवि हूं। तो वह बातचीत करने लग गया। फौजी ने बताया कि उसने लद्दाख में नौकरी की है। यँहा पर "थ्री इडियट " फिल्म की शूटिंग हुई है। आखरी वाले सीन पर करीना कपूर एक स्कूटर पर आती है, ये वही जगह है । एक लड़का वहां करीना कपूर वाले स्कूटर पर सेल्फी खींचने के 50 से 100 रुपये  लेता है। तो वहां पर एक झील है , जो कि 86 किलोमीटर में फैली हुई है । इसका कुछ हिस्सा भारत में है और बाकी हिस्सा चीन में। वो झील दिन भर में कई बार रंग बदलती है ।मोबाइल की तस्वीरें दिखाई। फिर आपको हम सो गए । आधी रात को फौजी भाई के  बाएं फेफड़े के नीचे  और  बाईं बाजू में दर्द हो गया। मुझे लगा ये दिल का दर्द ना हो। मैंने अक्युप्रैशर से ठीक करने की कोशिश की पर बात बनी नहीं  तो मैंने पेरासिटामोल दी। फिर उससे भी बात नहीं बनी तो मैंने  इनो दी। उससे  उसे तुरंत आराम आ गया।  सुबह दिल्ली निजामुद्दीन ट्रेन पहुंची। तो आटो से मैं पुरानी दिल्ली के लिए  निकला। रास्ते में पार्क आता है जिसमें दुनिया के सात अजूबे हैं। ये पार्क कूड़े करकट से बना हुआ है ,इसको अंदर जाने के लिए एक टिकट है। दिल्ली पहुंच कर ट्रेन पकड़ी। ट्रेन पहुंचकर रामपुर, रामपुर से फिर मुसाफिर अपने रुद्रपुर घर वापस आ गए।